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कोरोना की वजह से चीन की दुनियाभर में किरकिरी हो रही है. इस संकट के बीच विदेशी निवेशकों को लुभाने के लिए भारत के पास एक मौका है, और भारत उसे भुनाने में जुटा है. कई ऐसे प्रोडक्ट्स इस महामारी के बीच भारत में बड़े पैमाने पर तैयार किए जा रहे हैं, जिसके लिए चंद महीने पहले तक देश पूरी तरह से चीनी आयात पर निर्भर था.

चीनी वस्तुओं के बहिष्कार को लेकर कंफेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) खुलकर सामने आई है। कैट की ओर से चीनी वस्तुओं के बहिष्कार के मद्देनजर बुधवार यानी 10 जून से एक बड़ा अभियान शुरू करने का फैसला लिया गया है। यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ को प्रोत्साहन देने में मददगार होगा। कैट की ओर से कहा गया है कि हमारा लक्ष्य है कि दिसंबर 2021 तक चीनी वस्तुओं के भारत द्वारा आयात में लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये कम कर दिए जाएं। कैट ने चीन से आयात होने वाले लगभग 3 हजार उत्पादों की ऐसी सूची बनाई है, जिन वस्तुओं के आयात न होने से भारत को कोई अंतर नहीं पड़ेगा और वह सारी वस्तुएं भारत में पहले से ही बन रही है।

दरअसल, सरकार लगातार देश में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने पर योजना में जुटी है. इसी कड़ी में पिछले दिन 20 लाख करोड़ रुपये के आत्मनिर्भर भारत पैकेज का ऐलान किया. सरकार देश के लोगों से अपील कर रही है कि स्वदेशी प्रोडक्ट्स का ज्यादा-ज्यादा से इस्तेमाल करें, तभी भारत संपन्न राष्ट्र बनेगा

सरकार की इस मुहिम में देश तमाम बड़े उद्योगपति भी सहयोग कर रहे हैं, ताकि भारत को कोरोना संकट के बीच मैन्युफैक्चरिंग हब बनाया जा सके और चीनी वस्तुओं का इस्तेमाल धीरे-धीरे बंद हो सके.

अब देश के व्यापारियों के शीर्ष संगठन (कैट) ने देशभर में चीनी वस्तुओं के बहिष्कार को लेकर 10 जून से क राष्ट्रीय अभियान छेड़ने का ऐलान किया है. कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने इसे ‘भारतीय सामान-हमारा अभिमान’ नाम दिया है.

कैट ने कहा कि दिसंबर 2021 तक चीनी वस्तुओं की आयात में लगभग 1 लाख करोड़ रुपये कम करने का लक्ष्य रखा है. कैट ने चीन से आयात होने वाले लगभग 3000 उत्पादों की ऐसी सूची बनाई है, जिन वस्तुओं के आयात न होने से भी भारत पर कोई असर नहीं पड़ेगा. क्योंकि ये सारी वस्तुएं भारत में पहले से ही बन रही हैं.

अभियान के अंतर्गत कैट व्यापारियों को चीनी प्रोडक्ट्स न बेचे जाने के लिए अपील करेगा. इसके बदले स्वदेशी उत्पादों को इस्तेमाल में लाने का आग्रह किया जाएगा. पीएम मोदी की नीति ‘लोकल पर वोकल’ को सफल बनाने में कैट अहम भूमिका निभाएगा.

इस अभियान की घोषणा करते हुए कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी सी भरतिया और राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने बताया की चीन हमेशा से ही महत्वपूर्ण मामलों में भारत का विरोधी रहा है और पाकिस्तान की भारत के खिलाफ कुटिल चालों और आतंकवाद को बढ़ावा देने में अप्रत्यक्ष रूप से बड़ा हाथ रहा है.

उन्होंने बताया कि व्यापारियों ने यह भी अनुभव किया है कि ग्राहकों में भी चीनी वस्तुओं को लेकर एक आक्रोश है और वो भी अब चीनी वस्तुओं के स्थान पर स्वदेशी वस्तुओं को खरीदने के लिए ज्यादा तैयार हैं. भारत में चीनी वस्तुओं को बढ़ावा देने के पीछे चीन की एक सोची समझी साजिश है.

गौरतलब है कि वर्ष 2001 में भारत में चीनी वस्तुओं का आयात केवल 2 अरब डॉलर का था, जो वर्ष 2019 में 70 अरब डॉलर हो गया है. केवल लगभग 20 वर्षों में यह आयात लगभग 35 गुना बढ़ गया. हालांकि सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम की वजह से वर्ष 2018 से अब तक चीन से आयात में लगभग 6 अरब डॉलर की कमी हुई है.

भरतिया और खंडेलवाल ने बताया की 10 जून से इस अभियान के तहत जब तक परिस्थितियां सामान्य नहीं हो जाती तब तक कैट देश के सभी राज्यों के व्यापारिक संगठनों से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये बात करेगा और आग्रह करेगा की व्यापारी चीनी सामान को बेचने की जगह भारतीय उत्पादों को बेचें.

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